हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मजमा-ए-उलमा व खुतबा मुंबई और मस्जिद-ए-ईरानियान मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में, मस्जिद-ए-ईरानियान मुंबई में सुप्रीम लीडर शहीद आयतुल्लाहिल उज़मा सय्यद अली ख़ामेनई और रमज़ान युद्ध के अन्य शहीदों की याद में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में मोमिनीन ने भाग लेकर अपने शहीद नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस सभा में भारत में इस्लामी क्रांति के नेता के प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ ईरानी कॉन्सुलेट मुंबई के कॉन्सुलर जनरल जनाब मोहम्मद रज़ा मुतल्लक़ और ईरानी कल्चर हाउस मुंबई के डायरेक्टर फ़ाज़िल साहब भी मौजूद थे।

इसके अलावा, मुंबई के कई उलमा-ए-किराम और प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी सभा में भाग लिया, जिनमें भारत में आयतुल्लाहिल उज़मा सिस्तानी के वकील हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना सय्यद अहमद अली आबिदी, हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना सय्यद हुसैन महदी हुसैनी, शिया उलमा बोर्ड महाराष्ट्र के प्रमुख हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना सय्यद मोहम्मद असलम रिज़वी, अंजुमन-ए-सारुल्लाह के संस्थापक हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना फ़रमान मूसवी, मजमअ-उलमा व खुत्बा मुंबई के अध्यक्ष हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना फ़य्याज़ बाकिर हुसैनी, और मस्जिद-ए-ईरानियान के इमाम-ए-जमात हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना नजीबुल हसन जैदी शामिल हैं।

सभा की शुरुआत सुबह 11:30 बजे तिलावत-ए-कलाम-ए-पाक से हुई, जिसकी सआदत मौलाना अब्दुल्लाह हसनी ने हासिल की। इसके बाद मौलाना माहिर जाफरी ने मंज़ूम नज़राना-ए-अकीदत पेश किया।

तत्पश्चात, वक्ताओं ने संबोधित किया। सबसे पहले हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना सय्यद हुसैन महदी हुसैनी ने इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाहिल उज़मा ख़ामेनई की शहादत के बाद चयनित सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैय्यद मुजतबा ख़ामेनई (दाम-ए-ज़िल्लुहुल-आली) के संदर्भ में बात की।
मुंबई में सुप्रीम लीडर की याद में भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा, उलमा-ए-किराम और जनता की भरपूर भागीदारी
उन्होंने कहा कि इस्लामी क्रांति के नेता आयतुल्लाह सैय्यद मुजतबा ख़ामेनई अपने पिता की तरह बहादुर और बा-बसीरत हैं, और पवित्र रक्षा युद्ध के दौरान एक सिपाही के रूप में इस्लाम के दुश्मनों के खिलाफ युद्ध का अनुभव रखते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनके नेतृत्व में ईरान अमेरिका-इस्राईल मोर्चे के मुकाबले में सफल होगा और दुश्मन हमेशा की तरह अपमानित होगा।

इसके बाद आयतुल्लाहिल-उज़मा सिस्तानी के वकील हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन मौलाना सय्यद अहमद अली आबिदी ने विचार व्यक्त करते हुए भारत में इस्लामी क्रांति के नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की और सुप्रीम लीडर की मजलूमाना शहादत पर गहरे शोक व आक्रोश का इजहार किया।

ईरानी कॉन्सुलेट मुंबई के कॉन्सुलर जनरल जनाब मोहम्मद रज़ा मुतल्लक़ साहब ने भी भाषण दिया। उन्होंने इस्लामी क्रांति के नेता की शहादत पर शोक व्यक्त करते हुए भारतीय जनता का शुक्रिया अदा किया और ईरान के लिए उनके समर्थन को दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों का प्रतीक बताया।

सभा का अंतिम भाषण विशिष्ट अतिथि भारत मे वली फ़क़ीह के प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लेमीन डॉक्टर अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने दिया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि क्रांति के नेता की मजलूमाना शहादत के बाद भारत की जनता ने जिस तरह शोक और एकजुटता का इजहार किया, वह हमारे लिए संतोष का कारण है। उन्होंने कहा कि हर मज़हब के लोगों ने हमारे ग़म में शिरकत की, जो इस बात का प्रमाण है कि इंसानी हमदर्दी की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने आगे कहा कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने भरपूर स्वागत किया और इस मुश्किल समय में ईरान के साथ खड़े रहने का विश्वास दिलाया, यहाँ तक कि बच्चों ने भी व्यावहारिक रूप से मदद में हिस्सा लिया, जिसके लिए हम सभी उनके शुक्रगुज़ार हैं।

अंत में नाज़िम-ए-जलसा सय्यद मोहम्मद हैदर इस्फ़हानी ने सभी मेहमानों और हाज़रीन का शुक्रिया अदा किया, विशेष रूप से जलसे के प्रबंधन और हाज़ेरीन की सुविधाओं का ध्यान रखने पर मौलाना कल्बे जाफ़र ख़ान और मौलाना वसी हैदर नकवी का आभार व्यक्त किया।














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